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Monday, February 18, 2013

"बेइंतेहा मोहब्बत"




अभी कल ही तो खरीदी है हमने 
दो-चार पल की खुशियाँ 
कुछ  हसी
कुछ गम
और साथ में----------थोड़े से आँसू,!!

देखते है कितने दिन चलती है 
पर हा, 
अब मैं किसी से कुछ साझा नहीं करता 
तुम भी मुझसे कुछ सांझा करने को मत कहना 
अब मैं इस मामले में थोडा स्वार्थी हो गया हूँ !!

इस महंगाई के ज़माने में 
अब क्या क्या साझा करू 
वैसे भी कुछ बचा के नहीं रखा 
तुमसे -------
और जो रखा है उसमे अब----तुम तो नहीं ही हो !!

न जाने आगे समय रहे न रहे
न जाने आगे मैं इन्हें फिर से खरीद भी पाऊं या नहीं ,
या बस दूर से ही मन मसोस कर रहना पड़े 
इसलिए, 
मैं इन्हें जी भर के अकेले ही 
भोगना चाहता हूँ 
वैसे भी दूर से आती इनकी महक 
और खुद से ही टकराकर लौटती इनकी प्रतिध्वनि
मुझे पागल सा कर देती है !!

हा कभी तुम भी चाहो 
-----------कुछ ऐसा ही 
तो बस किसी से बेइंतेहा मोहब्बत कर लेना !!

अमर =====

20 comments:

  1. हा कभी तुम भी चाहो ---- कुछ ऐसा ही
    तो बस किसी से बेइंतेहा मोहब्बत कर लेना !!

    बहुत शानदार उम्दा प्रस्तुति,,,

    recent post: बसंती रंग छा गया

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  2. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 20/02/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  3. ...कितनी गहराई है इस रचना के हर शब्द में...अति उत्तम!

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  4. हा कभी तुम भी चाहो
    -----------कुछ ऐसा ही
    तो बस किसी से बेइंतेहा मोहब्बत कर लेना !!
    अनुपम भाव संयोजन ....बेहतरीन गहन भाव अभिव्यक्ति ....

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  5. बेइंतेहा मुहब्बत ज़िन्दगी में सिर्फ एक बात एक ही इंसान से कर सकते हैं | उसके बाद तो बस समझौते ही होते हैं | सुन्दर रचना | बधाई

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  6. अद्भुत प्रेम को दर्शाती रचना बहुत ही सुन्दर एक मोहक प्रेम की तरह
    मेरी नई रचना
    एक स्वतंत्र स्त्री बनने मैं इतनी देर क्यूँ

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  7. This comment has been removed by the author.

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  8. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि कि चर्चा कल मंगल वार 19/2/13 को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका हार्दिक स्वागत है

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  9. सम्पूर्ण अभिव्यक्ति ..

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  10. सुंदर भाव .... पर यह सब खरीदी कहाँ से ?????

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  11. क्या खूब कहा आपने वहा वहा क्या शब्द दिए है आपकी उम्दा प्रस्तुती
    मेरी नई रचना
    प्रेमविरह
    एक स्वतंत्र स्त्री बनने मैं इतनी देर क्यूँ

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  12. काल सबसे कर वसूल रहा है..अधिक नहीं स्थिर रहेंगीं।

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  13. देखते है कितने दिन चलती है
    पर हा,
    अब मैं किसी से कुछ साझा नहीं करता
    तुम भी मुझसे कुछ सांझा करने को मत कहना
    अब मैं इस मामले में थोडा स्वार्थी हो गया हूँ !!
    याद रखें ,बेइंतहा महोब्बत चाहे कितनी भी हो पर समझोते करने ही होतें हैं ,जिनके बिना जीना संभव नहीं.
    अछि प्रस्तुति

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  14. उम्दा प्रस्तुति...

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  15. मुहबत का नशा बोलता है सर चढके ...
    उमदा भाव ...

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  16. बहुत खूब ...एक प्यार ऐसा भी

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