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Thursday, January 13, 2011

"मेरे जीवन साथी"


हों तुम क्या मेरे लिए 
कैसे बताऊँ, 
मै तुमसे अब कैसे छुपाऊ
कुछ मैं आधा  अधुरा  हूँ  
कुछ तुम पूरी - पूरी है,
फिर मै कैसे कहू की 
ये तुम हो !
ये मै हूँ !
जब की हम एक है 

गिर रही है बिजली
सागर में दूर कही,
उठ रही है तरंगे
मेरे मन में यहीं कही,
छा रहा है आँखों में नशा
तेरे खुमार का, 
फिर मै  कैसे कह दूँ 
ये तुम हो !
ये मै हूँ !
जब की हम एक है 

तुम बदले तो क्या बदले
पर्वतों  के  भी रंग
बदल गए,
पंछी ठहरे रात को 
और दिन में मचल गए,
फिर मै कैसे कह दूँ  की 
ये तुम हो
ये मै हूँ 
जब की हम एक है 

गंगा -जल  
मैला नहीं है आज भी, 
न जाने कितनो ने,
इसमें डुबकी लगायी
वो तो तारनहार  है,
तारेगी,  
मेरे इस जीवन को ,
तुम तो सदियों से मेरी हों
जन्मो - जन्मो को तारोगी  
फिर मै कैसे कह दूँ 
की ये तुम हो 
यें में हूँ
जब की हम एक है 

"मेरे जीवन साथी"

68 comments:

  1. काफी सुंदर तरीके से अपनी भावनाओं को अभिवयक्त किया है .

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  2. ऐसा कमाल का लिखा है आपने कि पढ़ते समय एक बार भी ले बाधित नहीं हुआ और भाव तो सीधे मन तक पहुँच गए..

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  3. काफी सुंदर तरीके से अपनी भावनाओं को अभिवयक्त किया है|

    ReplyDelete
  4. प्रभावी भावाभिव्यक्ति.....

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  5. फिर मै कैसे कह दूँ की

    ये तुम हो

    ये मै हूँ

    जब की हम एक है
    प्रेम की सुन्दर अभिव्यक्ति। बधाई ।

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  6. Patali-The-Village ji Shukriya yaha tak aane aur rachna ka maan rakhne k liye

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  7. Aadarniya Nirmala Kapil ji Bahut - Bahut Shukriya

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  8. बहुत सुंदर है आपकी भावानुभूति !लिखते रहिये ! बधाई

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  9. Pranam (BADI "MAA") aapka ashirwad aise hi milta rahe bus ye hi abhilasha hai

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  10. itna achhca jeevan saathi mil jaye.., to aur kya chahiye jeevan ko.....

    bahut sunder khwaish........

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  11. Bahut snder likhte hain aap.......khwahish karte rahiye jarur poori hogi......

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  12. CS Devendra K Sharma "Man without Brain" ji bahut bahut shukriya yaha tak aane k liye

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  13. Sandhya ji hausla afjai k liye bahut bahut shukriya

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  14. "तुम तो सदियों से मेरी हों
    जन्मो - जन्मो को तारोगी
    फिर मै कैसे कह दूँ
    की ये तुम हो
    यें में हूँ
    जब कि हम एक है "
    भावपूर्ण मन कि सच्ची अभिव्यक्ति......

    आपका मेरे ब्लॉग पर आने का शुक्रिया!!

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  15. "तुम तो सदियों से मेरी हों
    जन्मो - जन्मो को तारोगी
    फिर मै कैसे कह दूँ
    की ये तुम हो
    यें में हूँ ...
    लाजवाब ... बहुत उम्दा प्रस्तुति ... दिल की गहराइयों में प्रेम बसा हो जैसे ..

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  16. Naswa Ji aapka yaha thak aana aur rachna ko sarahne k liye apko bahut bahut shukriya

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  17. bhavnayen bahut achhi hain...........man k taar chhuti hui rachna.........

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  18. फिर मै कैसे कह दूँ की

    ये तुम हो

    ये मै हूँ

    जब की हम एक है
    दिल की गहराइयों se प्रेम की सुन्दर अभिव्यक्ति।

    आपका मेरे ब्लॉग पर आने का शुक्रिया!

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  19. अमेन्द्र जी नमस्ते !
    "कुछ मैं आधा अधुरा हूँ
    कुछ तुम पूरी - पूरी हो"
    वाह!.....बहुत खूब शब्द दियें है आपने अपनी भावनाओं को........

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  20. Ankur Jain Ji yaha tak aane k liye bahut bahut shukriya

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  21. Rajni ji yaha tak aane aur rachna sarahane k liye bahut bahut sukriya

    ReplyDelete
  22. अमरेन्‍द्र भाई, जीवन के अनछुए पहलुओं को आपने काफी खूबसूरती से उकेर दिया है। हार्दिक बधाई।

    ---------
    ज्‍योतिष,अंकविद्या,हस्‍तरेखा,टोने-टोटके।
    सांपों को दुध पिलाना पुण्‍य का काम है ?

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  23. अमरेन्द्र अमर जी

    क्या बात है ! बहुत तबीयत से लिखते हैं आप तो …
    वाह वाऽऽऽह … !
    हो तुम क्या मेरे लिए …
    कैसे बताऊं ?
    मै तुमसे अब कैसे छुपाऊं ?

    सच बहुत कठिन काम है !
    कह भी नहीं सकते और रह भी नहीं सकते …

    ख़ूबसूरत रचना और ख़ूबसूरत ब्लॉग के लिए हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !

    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  24. Rajendra Swarnkar ji bahut bahut aabhar apka ......aapke hauslo se hi mere pank parwaj hote hai ...ummed krta hu ab milna julna lag rahega .....
    shukriya.......

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  25. Very nice expressions Amar ji............."Tum badle to kya badle parvaton ke bhi rang badal gaye"......Waah waah

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  26. bahut sundar likha hai bhai..umda...!!

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  27. Dear Bro Sanu Thanx for nice comment......

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  28. मन के भावों को खूबसूरत शब्द दिए हैं ..हम की भावना यूँही बनी रहे

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  29. Sangita Di Ji Shukriya aapka ashirwad yu hi bana rahe.........

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  30. यही तो अहसास है जीवन साथी का...
    बहुत खूबसूरत रचना...

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  31. सुंदर भावाभिवयक्ति। बधाई।

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  32. हों तुम क्या मेरे लिए
    कैसे बताऊँ,
    मै तुमसे अब कैसे छुपाऊ
    कुछ मैं आधा अधुरा हूँ
    कुछ तुम पूरी - पूरी है,

    बहुत सुंदर भाव....

    ReplyDelete
  33. Dr (Miss) Sharad Singh ji Thanx for attend my blog......

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  34. V!Vs ji yaha tak aane aur rachna ka maan rakhne k liye bahut bahut shukriya.umeed hai ab milna julnalaga rahega

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  35. Veena ji bahut bahut abhari hu aapka.....shukriya aapke itne sunder comments k liye

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  36. गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाइयाँ !!

    Happy Republic Day.........Jai HIND

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  37. सुंदर तरीके से अपनी भावनाओं को अभिवयक्त किया है .

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  38. Shiva Ji yaha tak aane aur rachna ka maan rakhne ke liye bahut bahut shukriya........

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  39. तुम तो सदियों से मेरी हों
    जन्मो - जन्मो को तारोगी

    एक बेहद भाव पूर्ण रचना ...शुक्रिया

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  40. Kewal ram ji bahut bahut shukriya ................

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  41. जब की हम एक है
    प्रेम की सुन्दर अभिव्यक्ति। बधाई ।

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  42. Deepak ji hausla afjai k liye bahut bahut shukriya

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  43. आप और आपके जीवन साथी दोनों ही बधाई के पात्र हैं.इतनी
    सुंदर भावाभिव्यक्ति आपके पवित्र मानस से उद्घटित हुई की उसने सभी के मानस को आनंद रस से सराबोर कर दिया है.प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि भावाभिव्यक्ति की पावन सरिता यूँ ही आपके मानस से सदा प्रभावित होती रहे.

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  44. Rakesh Kumar ji sabse pahle aapko meri or se Naman, aur ab itne acche aur itne pyare comments ke liye bahut bahut shukriya

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  45. Sushma ji yaha tak aane ke liye shukriya

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  46. बहुत ही सुन्दर रागात्मक सम्बन्धों की कविता .

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  47. Kavita Rawat ji shukriya ...aise hi aana jana laga rahe to bahut accha lagega..aabhar

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  48. jitni khoobsoorat bhavna utni hi sundar prstuti .

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  49. Rajwant Raj Shab Shurkiya yaha tan aakne ayr rachna ka maan banaye rakhne ke liye

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  50. गंगा -जल
    मैला नहीं है आज भी,
    न जाने कितनो ने,
    इसमें डुबकी लगायी
    वो तो तारनहार है,
    तारेगी,
    very nice.

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