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Thursday, February 13, 2014

देवदूत ---

यही कहीं 
बाँध कर, 
छोड़ा था मैंने 
तुम्हारी यादों को 

और यही कही 
तुमने भी,
लपेट कर सफ़ेद चादर में,
दफनाया था
मेरी यादों को,

मैं आज फिर से
लौट आयीं हूँ,
तुम्हारी यादों को
समेट कर
ले जाने को,

क्या तुम भी
लौट आओगे,
सब भूलकर
मुझे अपनाने,

याद रखना,
गलतियाँ करना
इंसानी फितरत है
और उन्हें माफ़ करना
"रूहानी"

और तुम कभी भी
मेरे लिए ,
कम नहीं रहे
किसी फ़रिश्ते से ................

अमर====

11 comments:

  1. लाजबाब,बेहतरीन प्रस्तुति...!
    RECENT POST -: पिता

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  2. बहुत ही भावप्रधान रचना।

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  3. बहुत खूबसूरत भावाभिव्यक्ति !
    NEW POST बनो धरती का हमराज !

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  4. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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  5. और तुम कभी भी
    मेरे लिए ,
    कम नहीं रहे
    किसी फ़रिश्ते से
    bahut khoob
    rachana

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  6. वाह!!
    बहुत सुन्दर रचना....
    अनु

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  7. कोमल भावसिक्त बहुत ही सुन्दर रचना...
    :-)

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  8. pretty nice blog, following :)

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  10. मुझे आपका blog बहुत अच्छा लगा। मैं एक Social Worker हूं और Jkhealthworld.com के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य के बारे में जानकारियां देता हूं। मुझे लगता है कि आपको इस website को देखना चाहिए। यदि आपको यह website पसंद आये तो अपने blog पर इसे Link करें। क्योंकि यह जनकल्याण के लिए हैं।
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  11. माफ़ करना सबसे बड़ी कला है जिसे हासिल करना आसान नहीं है..

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