Followers

There was an error in this gadget

Labels

Loading...
Loading...

Monday, July 12, 2010

कोई रिश्ता सा है शायद





ये बारिश का मौसम ,

और तेरी याद का आना ,

दोनों में कोई रिश्ता सा है शायद ,

ये जब भी आतें है ,

झूम के आते है ,


घर टूटे या टूटे इंसान ,

या अपना काम कर के ही जाते है ,


वो बहुत रोया है.

मेरे घर के आँगन में ,

तपिश उसकी अब भी ,

मेरी साँसों में है ,


रुक -रुक के कभी तो कभी बेखटक रोया है ,

हर बार सिर्फ उसने मुझे ही भिगोया है ,

ये बारिश का मौसम ,

और तेरी याद का आना I