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Friday, March 26, 2010

~ "मिलन की कहानी "~


~ "मिलन की कहानी " ~

"कही फूल कही भवरे कही रात और दिन ...

सारी रुत तेरी मेरी कहानी निकले ..."


"जब भी तेरा ख्याल करू ...

मेरी सांसो से तेरी ही खुशबु निकले ..."


"कही ओस कंही बादल तो कही रिमझिम बारिश ...

सारे मंजर में तेरे मेरे ही किस्से निकले ..."


"कही पत्तो की सरसराहट कही चाँद और चांदनी . ..

सारी रंगिनिया तेरे मेरे मिलन की कहानी निकले ..."


"दूर होकर भी हम दूर नहीं ............

आज दुरी के उस पार 'हम' निकले ................

"माँ मै कोसो दूर हूँ तुमसे"


"माँ मै कोसो दूर हूँ तुमसे"

माँ मै कोसो दूर हूँ तुमसे
पर तुम मेरे पास हो माँ


रोज रात में बाते करती, बिना फ़ोन के मेरी माँ
पास नहीं दूर हूँ उनसे , फिर भी मेरे पास है माँ

हर रात को सोने से पहले , लोरी अब भी गाती माँ
मुझे खिलाकर और सुलाकर , सोने जाती मेरी माँ

कैसे मेरे दिन -रात गुजेरते
बिन तेरे हैरान हूँ माँ ..........

आज नहीं कल आ जाऊंगा
दो दिन की तो बात है माँ


"माँ मै कोसो दूर हूँ तुमसे
पर तुम मेरे पास हो माँ