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Friday, August 12, 2011

तेरा- मेरा प्यार



मेरे दिल कि हसरतो का
'गुबार' अभी बाकी है 
रुक जा ओ  मेरे यार
तेरा- मेरा प्यार अभी बाकी है 

दो घडी को तो ठहर 
अभी 'इबादत ए रात' बाकी है 
रोज मिलते है बेगानी राहों में 
अभी 'तेरा मेरा साथ' बाकी है 

तेरा आना,
यु बिन श्रृंगार 
य़े बात अभी बाकी है 
इजहारे -ए-मोहब्बत का 
वो लम्हा- ए-सुहानात अभी बाकी है 

होकर मेरे, गैरों से मिलना 
य़े कैसी  आदत है तेरी 
बेवजह तो नहीं, 
तेरा सज धज के निकलना 
गैरों के लिए 
य़े किस्सा-ए-ख्यालात  अभी बाकी है 

मेरी आँखों से बरसना 
रुक रुक के तेरा 
कैसे मुमकिन है य़े 
जबकि मेरे लबो पे तेरा नाम अभी बाकी है 
रुक जा ओ  मेरे यार
तेरा- मेरा प्यार अभी बाकी है 

रुसवाई ही सही, तेरी,
मेरे लिए, 
कुछ तो है 
तेरे  मेरे दरम्यान       
इसी  इक  रिश्ते  का मज्मात  अभी  बाकी  है 
रुक जा ओ  मेरे यार
तेरा- मेरा प्यार अभी बाकी है 
                                 
                                            अमरेन्द्र 'अमर'