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Thursday, April 21, 2011

तुम भी चले आना'



जब तक 
तुम्हारी  खुशिया तुम्हारे साथ है 
तुम कही भी रहों, 
पर जब भी तुम उदास होना
आँखों में बारिश का अहसास होना  
चाहो तुम किसी अपने के,
काँधे पे सर रख कर रोना 
तब बिन बताये 
बिन बुलाये 
चले आना 
मै इन्तेजार करूँगा तुम्हारा 
मै भी साथ दूंगा तुम्हारा 
अभी मुझ पे तुम्हारा एहसान बाकी  है 

मै बहुत रोया था उस रात 
जो तुमने सहारा दिया था, 
अपने आँचल का 
"बहुत भीगा था उस रात 
वो आँचल तुम्हारा,
उसकी वो नमी अब भी तेरे रुखसार पे है,"

तब से अब तक न रो सका हूँ मै
जब कि आँसू-ए- समुन्दर अपने सबाब पे है 
चले आना इसी बहाने, 
क्या पता ये बाँध कब टूट जाये  
और इस सैलाब में,
मै बह जाऊ,
इससे पहले तुम चले आना 
इसे बहाने......... 
 
जब भी आना बिन बताये'
बिन बुलाये;
बुलाया तो गैरों को जाता है 
अपने तो बस चले आते है ,
अपनों से मिलने 
तुम भी चले  आना'

120 comments:

  1. ये कैसी व्‍यथा, कैसी उदासी.

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  2. jab bhi yaad aati hai uski to kuch derd sa de jati hai .ye usi ki vytha hai aur uski hi udasi hai ............

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  3. Hriday ki pukar apne hi sunte hai..bin bulaye chale v aate hai...hriday se nikalti rachana....sundar

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  4. जब तक
    तुम्हारी खुशिया तुम्हारे साथ है
    तुम कही भी रहों,
    पर जब भी तुम उदास होना
    आँखों में बारिश का अहसास होना
    चाहो तुम किसी अपने के,
    काँधे पे सर रख कर रोना
    तब बिन बताये
    बिन बुलाये
    चले आना
    मै इन्तेजार करूँगा तुम्हारा
    मै भी साथ दूंगा तुम्हारा

    वाह अमरेन्द्र जी कहते हैं की अच्छी रचना तभी रचती है जब दिल उदास होता है , लाजवाब... बहुत गहरे और समर्पण के भाव है, पूरी रचना में...
    देखना एक दिन वो बिन बुलाये ही चले आयेंगे क्योंकि...
    बुलाया तो गैरों को जाता है
    अपने तो बस चले आते है...
    तो छोडिये ये उदासी... शुभकामनाये...

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  5. bahut khoob.
    bahut hee khoob.

    dil se nikli huee rachna ke liye aabhaar.

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  6. "मै इन्तेजार करूँगा तुम्हारा
    मै भी साथ दूंगा तुम्हारा
    अभी मुझ पे तुम्हारा एहसान बाकी है"
    प्रिय अमरेन्द्र ,यदि लोग इस बात को समझकर जीवन में अपना लें तो कोई समस्या ही नहीं रहेगी.बहुत सुंदर और भावपूर्ण सकारात्मक सोच है.तुम्हारी यह रचना रचनाकार के आह! से उपजी प्रतीत होती है.

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  7. मै बहुत रोया था उस रात
    जो तुमने सहारा दिया था,
    अपने आँचल का
    "बहुत भीगा था उस रात
    वो आँचल तुम्हारा,
    वाह मेरे भाई कमाल कर रखा है !
    वैसे तो आपका ब्लॉग ही कमाल का है, पर जब भी नया कुछ मिलता है काफ्फी बढ़िया लगता है !

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  8. Bahut lajawaab ... Amrendr ji ... gahri udaasi liye aapki rachna dil mein utar gai ...

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  9. जब इतनी आह होगी आवाज में तो कौन रुक पायेगा दोस्त देखो न रचना पढ़ते ही हमारे हाथ कैसे चलने लगे | :)
    बहुत खूबसूरती से दर्द को दर्शाने में कामयाब रचना |

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  10. सही कहा, अपनों को बिना बुलाए ही आना चाहिए।

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  11. मै बहुत रोया था उस रात
    जो तुमने सहारा दिया था,
    अपने आँचल का
    "बहुत भीगा था उस रात
    वो आँचल तुम्हारा,
    उसकी वो नमी अब भी तेरे रुखसार पे है,"

    बहुत ही बेहतरीन रचना...

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  12. बहुत खूबसूरती से दर्द को दर्शाने में कामयाब रचना |

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  13. दर्द भरे प्रेम की खूबसूरत अभिव्यक्ति ।

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  14. वाह अमरेन्द्र जी
    एक और सुन्दर कविता आपकी कलम से !

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  15. प्रेमपगी मन की वेदना ...बहुत सुंदर

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  16. हमें तो एक गाना याद आ गया आपकी पोस्ट पढ़कर.
    हम इंतज़ार करेंगे तेरा क़यामत तक.

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  17. जब भी आना बिन बताये'
    बिन बुलाये;
    बुलाया तो गैरों को जाता है
    अपने तो बस चले आते है ,
    अपनों से मिलने
    तुम भी चले आना'
    ant bahut hi khoobsurat hai ,kyonki isme adhikaar bandha hua hai ,bahut pyaari rachna .

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  18. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति.
    अपनों को दिल से याद किया और पुकारा है आपने.
    शानदार प्रस्तुति के लिए आभार.
    मेरे ब्लॉग पर आयें.रामजन्म का बुलावा है.
    काफी पहले आये थे आप.भूलिएगा नहीं.

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  19. अभी मुझ पे तुम्हारा एहसान बाकी है...
    bahut hi sundar abhivayakti...utna too upkar samajh koi jitna saath nibha de...doosaron ke hsaanon ko yaad rakhna badi baat hai...

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  20. .

    अभी मुझ पे तुम्हारा एहसान बाकी है...

    Beautiful expression. Very few people are grateful in this world.

    .

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  21. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति..

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  22. श्री श्री 1008 श्री खेतेश्वर जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  23. अपनों को दिल से याद किया और पुकारा है आपने.
    शानदार प्रस्तुति के लिए आभार.

    बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति.

    ReplyDelete
  24. अच्छी अभिव्यक्ति ...शुभकामनायें !!

    ReplyDelete
  25. जब भी आना बिन बताये'
    बिन बुलाये;
    बुलाया तो गैरों को जाता है
    अपने तो बस चले आते है ,
    अपनों से मिलने
    तुम भी चले आना'
    अच्छी अभिव्यक्ति ...शुभकामनायें !!

    ReplyDelete
  26. डा० अमर कुमार , ji shurkiya hausla afjai ke liye , aise hi aate rahiyega

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  27. Amrita Tanmay ji mere gher(Blog) padharne ke liye shukriya

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  28. संध्या शर्मा ji shukriya

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  29. विशाल ji rachna ka maan rakhne ke liye shukriya

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  30. Rajiv ji aapko rachna pasand aayi, shukriya

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  31. Dinesh ji rachna ka maan rakhne ke liye bahut bahut shukriya

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  32. दिगम्बर नासवा ji rachna ka maan rakhne ke liye bahut bahut shukriya

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  33. Minakshi Pant ji bus yahi chahat hai ki wo laut aaye,
    shukriya yaha tak aane ke liye

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  34. मनोज कुमार ji shukriya

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  35. अरुण चन्द्र रॉय ji aapke bahumulya comments ke liye bahut bahut shukriya

    ReplyDelete
  36. डॉ टी एस दराल ji yaha tak aane aur rachna ka maan rakhne ke liye bahut-bahut shukriya

    ReplyDelete
  37. sushma 'आहुति' ji shukriya

    ReplyDelete
  38. संजय भास्कर ji bahut bahut shukriya ,aise hi aap saath banaye rahiyega

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  39. डॉ॰ मोनिका शर्मा ji yaha tak aane aur apna bahumulya comments dene ke liye shukriya

    ReplyDelete
  40. ज्योति सिंह ji shukriya

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  41. Vaanbhatt ji rachna ka maan rakhne ke liye shukriya

    ReplyDelete
  42. ZEAL ji aapko tahe dil se salam , zab bhi aap yaha aati hai bda apnapan sa lagta hai ...........

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  43. Mukesh Kumar Sinha ji rachna ko sarahne ke liye shukriya

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  44. Sawai SIingh Rajpurohit ji shukriya

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  45. हो के आशिक परी रुख और भी नाज़ुक बनता जाएं रंग जितना खिलता जाएं है कि उतना उढ़ता जाएं है।

    आप का ब्लॉग पढ़ कर मन को तस्सली मिली कि कोई आज भी है अच्छा लिखने वाला।
    आप को समय मिले तो कभी हमारे ब्लॉग पर दस्तखत थे हमे और हमारे अनुसरणकर्ताओ को अच्छा लगेगा।

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  46. शिवकुमार ( शिवा) ji tahe dil se swagat kerta hu aapka, aise hi apna pyar banaye rakhiyega

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  47. सतीश सक्सेना ji shukriya

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  48. bahut sunder rachna..........shubhkamanaye....
    mere blog par ane ka shukriya.....

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  49. मर्मस्पर्शी रचना, अर्थों को समेटे हुए अच्छी लगी , बधाई

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  50. बहुत सुंदर सृजन भाई अमर जी बधाई और शुभकामनाएं |

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  51. सच है .. अपनों को बुलाने की क्‍या आवश्‍यकता ??

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  52. दिल की गहराई से निकली बेहतरीन रचना...

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  53. Rajnish tripath ji aapke bahumulye comments ne to yaha char chand hi laga diye hai ,aapka tahe dil se shukriya ada kerta hu

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  54. देवेन्द्र पाण्डेय ji shukriya saath dene ke liye

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  55. Suman ji rachna ki tareef kerne ke liye aapka bahut bahut shukriya

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  56. जयकृष्ण राय तुषार ji aapko bhi bahut bahut badhai

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  57. संगीता पुरी ji aapka to mai kab se intejar ker raha tha .........aapaka aana acha lagta hai

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  58. Upendra ji is baar bahut dino ke baad aaana hua yaha pr ..aapka aana accha laga.....

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  59. बुलाया तो गैरों को जाता है
    अपने तो बस चले आते है....
    bahut sundar baat.

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  60. jab prem saccha hota hai to uski tadap bhi aisi hi hoti hai jiske dard se har aankh nam ho jaye........ aapki rachna us dard ko bya kar rahi.........aabhar bahut bhavmayi v dard se bhari rachna hai .....

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  61. अमरेंदर जी... एक बहुत सुन्दर दर्द भरा बुला .. तुम भी चले आना ... सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  62. मै बहुत रोया था उस रात
    जो तुमने सहारा दिया था,
    अपने आँचल का
    "बहुत भीगा था उस रात
    वो आँचल तुम्हारा,
    उसकी वो नमी अब भी तेरे रुखसार पे है,"

    तब से अब तक न रो सका हूँ मै
    जब कि आँसू-ए- समुन्दर अपने सबाब पे है
    चले आना इसी बहाने,
    क्या पता ये बाँध कब टूट जाये

    bahut khoobsurat rachna, premras se kahin jyada badhkar bhaav liye....

    shubhkamnayen

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  63. mridula pradhan ji bahut bahut shukriya

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  64. रजनी मल्होत्रा नैय्यर ji bahut bahut shukriya hausla afjai ke liye, aise hi aana jana laga rahe to accha lagta hai

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  65. डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ji rachna ka maan badhane ke liye bahut bahut shukriya

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  66. सुँदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति . आभार .

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  67. उसकी वो नमी अब भी तेरे रुखसार पे है

    वाह, बहुत खूब !

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  68. वो आँचल तुम्हारा,
    उसकी वो नमी अब भी तेरे रुखसार पे है,"
    "words with emotional touch"
    regards

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  69. Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ji yaha tak aane aur rachna ka maan rakhne ke liye bahut bahut shukriya

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  70. seema gupta ji thanx a loy for coming in my blog........

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  71. नमस्कार,
    आपने लिखा कि तुम भी चले आना, लो जी हम चले आये,
    उत्तम रचना।

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  72. एक दिन मेरे आंसू मुझसे पूछ बैठे,हमे रोज़ रोज़ क्यों बुलाते हो
    हमने कहा ,हम याद तो उन्हे करते हैं,तुम क्यों चले आते हो ...

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  73. जाट देवता ji hausla afjai ke liye shukriya, umeed hai aise hi aage bhi aapka saath milta rahega

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  74. अमित श्रीवास्तव ji shukriya itna sunder complimet diya aapne********

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  75. sunder udgaar....

    jai baba banaras........

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  76. प्रेम में विरह की समर्पित भाव भरी ह्रदयस्पर्शी रचना....

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  77. अमरेन्द्र जी नमस्ते!
    कैसे है आप ...
    प्रेम में हक़ होता है...ये हक़ माँगा नहीं जाता बस दिया जाता है....
    बहुत खूबसूरत रचना ....

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  78. आप की बहुत अच्छी प्रस्तुति. के लिए आपका बहुत बहुत आभार आपको ......... अनेकानेक शुभकामनायें.
    मेरे ब्लॉग पर आने एवं अपना बहुमूल्य कमेन्ट देने के लिए धन्यवाद , ऐसे ही आशीर्वाद देते रहें
    दिनेश पारीक
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/
    http://vangaydinesh.blogspot.com/2011/04/blog-post_26.html

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  79. सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ji bahumulya comments dene ke liye bahut bahut shukriya

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  80. Pradeep ji bikul sahi kaha hai aapne.shukriya

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  81. Dinesh pareek ji bus aise hi mlna julna laga hi rahega..........choti se ye duniya .........pehchane raste hai

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  82. मै बहुत रोया था उस रात
    जो तुमने सहारा दिया था,
    अपने आँचल का
    "बहुत भीगा था उस रात
    वो आँचल तुम्हारा,
    उसकी वो नमी अब भी तेरे रुखसार पे है,"
    वाह अमरेन्द्र जी !
    सच में आपने रुला ही दिया..
    पहली बार आया आपके ब्लॉग पर लेकिन जाने का मन ही नहीं कर रहा..
    आपको इसी तरह हमेशा पढना चाहूँगा इसलिए आपका समर्थक बन रहा हूँ..
    avinash001.blogspot.com

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  83. Avinash ji itne sunder comments dene ke liye bahut bahut shukriya

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  84. !अपने तो बस चले आतें हैं ,तुम भी आना .मत रुलाना

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  85. veerubhai ji shukriya , aise hi aate rahiyega hamesha , rulaiyega nahi

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  86. मुझे याद पड़ता है कि कभी आप भी आये थे मेरे ब्लॉग पर.अब क्या हों गया है अमरेन्द्र भाई.कोई नाराजगी तो नहीं ?

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  87. अमरेन्द्र जी
    नमस्ते!
    ........बहुत खूबसूरत रचना

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  88. पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ |
    तारीफ के लिए हर शब्द छोटा है - बेमिशाल प्रस्तुति!
    शुभकामनायें आपको !!
    कृपया मेरे ब्लॉग पर आयें http://madanaryancom.blogspot.com/

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  89. जब भी आना बिन बताये'
    बिन बुलाये;
    बुलाया तो गैरों को जाता है
    अपने तो बस चले आते है ,
    अपनों से मिलने
    तुम भी चले आना....


    गहन अनुभूतियों की सुन्दर अभिव्यक्ति ...
    हार्दिक बधाई.

    ReplyDelete
  90. मदन शर्मा ji bahut bahut shukriya , aapka yaha aana bahut accha laga , aasha hai aise hi milna julna laga rahega ,

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  91. Dr (Miss) Sharad Singh ji tahedil se shukriya

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  92. बहुत खूबसूरती से दर्द को दर्शाने में कामयाब रचना

    ReplyDelete
  93. bahut dardnak
    Kya Karuna Hai Aapke Dil Me........................

    Ahhhhhhh.

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  94. anju choudhary..(anu) ji yaha tak aane ke liye bahut bahut shukriya

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  95. सुखदेव 'करुण' ji rachna ki sarthakta ko sidh kerne ke liye bahut bahut shukriya

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  96. विजय रंजन ji aapka aane se gher me raunak aa gayi hai shukriya

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  97. inspirational form of poem....very Nice .i liked it.

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  98. भावमय करते शब्‍दो के साथ ...बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  99. Sada ji bahut bahut shukriya yaha tak aane aur rachna ka maan badhane ke liye

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  100. बहुत खूबसूरत रचना आभार

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  101. मै बहुत रोया था उस रात
    जो तुमने सहारा दिया था,
    अपने आँचल का
    "बहुत भीगा था उस रात
    वो आँचल तुम्हारा,
    उसकी वो नमी अब भी तेरे रुखसार पे है,"



    lajabab rachana

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  102. तब से अब तक न रो सका हूँ मै
    जब कि आँसू-ए- समुन्दर अपने सबाब पे है
    चले आना इसी बहाने,
    क्या पता ये बाँध कब टूट जाये
    और इस सैलाब में,
    मै बह जाऊ,
    इससे पहले तुम चले आना
    इसे बहाने.........
    bahut dard hai.....

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