Followers

Labels

Powered By Blogger

Thursday, September 29, 2011

जिंदगी से कुछ पल उधार लिए




तेरी तस्वीर को दिल से लगाये बैठे है 
हम अपनी  ख्यालो की अलग दुनिया  बसाये बैठे है 
जिंदगी जो , अब तक व्यर्थ थी, मेरी
उसे तेरे लिए फागुन का मदमाता मौसम बनाये बैठे है 

महकी महकी सी साँसे मेरी 
तुमसे मिलने की है अभिलाषा मेरी 
अकेले ही चला था अमृत की तलाश में 
अब, तुझे पाने की आस में अपनी मृग तृषा बुझाये बैठे है 

दर्द की अंधी गली है , कोई भी न मोड़ है 
सभी स्वप्न टूटकर बिखरे है यहाँ, फिर भी 
हम तेरी खातिर उन गलियों से
रिश्ता निभाए बैठे है  

तेरी तस्वीर क्या मिली , मुझे यूँ लगा आइना मिल गया मुझको 
'सूरत-ए- अमर'  आईने में देखी नहीं कभी, तेरी तस्वीर को आईना बनाये बैठे है 

मिल गयी 'रौनक ए जहा' मुझको ,तेरे नाम से  
हम अपने नाम को तुझसे मिलाये बैठे  है 
बहारो ने भी लंगर डाल दिए, तेरे नाम से 
जो  झील के उस पार डेरा जमाये बैठे है 

मेरी हसरतो के तकाजो ने तेरे लिए, जिंदगी से कुछ पल उधार लिए 
हम अपनी हैसियत तो भूले ही थे , वो भी अब अपनी दुनिया भुलाये बैठे है 

101 comments:

  1. बहुत खूब ,दिल की गलियों की ये यादे ....बहुत अच्छी लगी ...ऐसे ही लिखते रहो ..

    ReplyDelete
  2. कुछ यादें... कुछ ख्वाब... यादें होती ही हैं संजोने के लिए... खूबसूरत रचना

    ReplyDelete
  3. किसी के प्यार में सारी हदें तोड़ देना ... इन्तहा है प्यार की ... बहुत खूब लिखा है ...

    ReplyDelete
  4. बेहतरीन प्रस्तुति , :)
    आपको व् आपके परिवार को नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाये

    ReplyDelete
  5. दर्द की अंधी गली है , कोई भी न मोड़ है
    सभी स्वप्न टूटकर बिखरे है यहाँ, फिर भी
    हम तेरी खातिर उन गलियों से
    रिश्ता निभाए बैठे है

    ....बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति..नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं !

    ReplyDelete
  6. "wo bhi ab apni duniya bhulaye baithe hai" bahut khubsurat rachna, APKI KVITAYE ANMOL HOTI HAI

    ReplyDelete
  7. bhut khub.
    dil ke sare gm ko kagj
    pr utar diya.

    ReplyDelete
  8. 'सूरत-ए- अमर' आईने में देखी नहीं कभी, तेरी तस्वीर को आईना बनाये बैठे है
    bahut sundar ,srangar ras me doobi huee shandar prastuti ke lie aapka abhar.

    ReplyDelete
  9. ग़ज़ल और कविता का मिश्रित रूप.
    परन्तु कहने का अंदाज बहुत ही लाजवाब. आभार!!

    ReplyDelete
  10. यादों में डूबी सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  11. बहुत खूब अमरेन्द्र जी...

    ReplyDelete
  12. मेरी हसरतो के तकाजो ने तेरे लिए, जिंदगी से कुछ पल उधार लिए
    हम अपनी हैसियत तो भूले ही थे , वो भी अब अपनी दुनिया भुलाये बैठे है ..,...........कभी मिलते कभी बिछड़ते
    कभी लड़ते कभी झगड़ते
    वीत गये वो सुनहरे पल
    काश हम उन लम्हों की अहेमियत समझते ........बहुत अची रचना अमरेन्द्र जी..........

    ReplyDelete
  13. तेरी तस्वीर क्या मिली , मुझे यूँ लगा आइना मिल गया मुझको
    'सूरत-ए- अमर' आईने में देखी नहीं कभी, तेरी तस्वीर को आईना बनाये बैठे है .....

    नितान्त अलग भावभूमि पर सुन्दर कविता के लिए बधाई...

    ReplyDelete
  14. बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने ! शानदार प्रस्तुती!
    आपको एवं आपके परिवार को नवरात्रि पर्व की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  15. Anu Di bahut bahut shukriya aapne rachna ka maan rakha........pranam

    ReplyDelete
  16. अरुण चन्द्र रॉय ji aapkorachna acchi lagai .shukriya ............

    ReplyDelete
  17. Amrita Tanmay ji hausla afjai ke liye bahut bahut aabhar

    ReplyDelete
  18. दिगम्बर नासवा ji tahe dil se shukriya rachna ke saath mera bhi maan rakhne ke liye

    ReplyDelete
  19. सुनील गज्जाणी ji shukriya yaha tak aane ke liye

    ReplyDelete
  20. Mukesh Kumar Sinha ji rachna ka maan rakhne ke liye aabhra.............

    ReplyDelete
  21. मिल गयी 'रौनक ए जहा' मुझको ,तेरे नाम से
    हम अपने नाम को तुझसे मिलाये बैठे है
    बहारो ने भी लंगर डाल दिए, तेरे नाम से
    जो झील के उस पार डेरा जमाये बैठे है

    bahot hi khubsurat panktiyan hain...lajawab rachna.

    ReplyDelete
  22. Kailash C Sharma ji yahat tak aane aur rachna ka maan rahne ke liye bahut bahut shukriya

    ReplyDelete
  23. Nisha Ji hausla afjai e liye bahut bahut shukriya

    ReplyDelete
  24. Subeer Rawat ji Rachna ke saath saath hamara bhi maan rakhne ke liye bahut bahut shukriya

    ReplyDelete
  25. यादों में डूबी बहुत ख़ूबसूरत रचना ........

    ReplyDelete
  26. Suman ji shukriya hauslaafjai ke liye

    ReplyDelete
  27. Sangeeta Swaroop ji rachna ka maan rakhne ke liye shurkiya ......aise hi sneh banaye rakhe.......aabhar

    ReplyDelete
  28. Mahesh Bermate ji shukriya .........

    ReplyDelete
  29. I am happy to get a blog as nice as I can find today. Fate led me to enjoy the beautiful words to me Definitely following! :)

    Funny Photo

    ReplyDelete
  30. प्रिय अमरेन्द्र जी ...सुन्दर भाव प्यारी रचना मन को छू गयी ...

    ढेर सारी हार्दिक शुभ कामनाएं .....जय माता दी आप सपरिवार को ढेर सारी शुभ कामनाएं नवरात्रि पर -माँ दुर्गा असीम सुख शांति प्रदान करें
    थोडा व्यस्तता वश कम मिल पा रहे है सबसे क्षमा करना
    भ्रमर ५

    दर्द की अंधी गली है , कोई भी न मोड़ है
    सभी स्वप्न टूटकर बिखरे है यहाँ, फिर भी
    हम तेरी खातिर उन गलियों से
    रिश्ता निभाए बैठे है

    ReplyDelete
  31. Dr. Varsha singh ji rachna ka maan rakhne ke liye bahut bahut shukirya

    ReplyDelete
  32. Adarniya Sameer ji mera to gher me raunak hi aa gayi..........aapka aana hamesha hi subh hota hai mere liye ..aabhar

    ReplyDelete
  33. तेरी तस्वीर को दिल से लगाये बैठे है
    हम अपनी ख्यालो की अलग दुनिया बसाये बैठे है
    जिंदगी जो , अब तक व्यर्थ थी, मेरी
    उसे तेरे लिए फागुन का मदमाता मौसम बनाये बैठे है nice

    ReplyDelete
  34. तेरी तस्वीर क्या मिली , मुझे यूँ लगा आइना मिल गया मुझको
    'सूरत-ए- अमर' आईने में देखी नहीं कभी, तेरी तस्वीर को आईना बनाये बैठे है !

    वाह ! कितनी ख़ूबसूरत बयानबाजी है.. बहुत सुन्दर रचना. बधाई ...

    ReplyDelete
  35. मिल गयी 'रौनक ए जहा' मुझको ,तेरे नाम से
    हम अपने नाम को तुझसे मिलाये बैठे है
    बहारो ने भी लंगर डाल दिए, तेरे नाम से
    जो झील के उस पार डेरा जमाये बैठे है ....vaah bahut sundar

    ReplyDelete
  36. सुन्दर अभिव्यक्ति,भावपूर्ण.

    ReplyDelete
  37. bahut sundar manbhaawan pankti...
    बहारो ने भी लंगर डाल दिए, तेरे नाम से
    जो झील के उस पार डेरा जमाये बैठे है
    shubhkaamnaayen.

    ReplyDelete
  38. दर्द की अंधी गली है , कोई भी न मोड़ है
    सभी स्वप्न टूटकर बिखरे है यहाँ, फिर भी
    हम तेरी खातिर उन गलियों से
    रिश्ता निभाए बैठे है


    मन की पीड़ा से उपजी बहुत मार्मिक, बहुत सुन्दर रचना...

    ReplyDelete
  39. yadon ke galiyaro se uthta shor shabdo me sunderta se samait liya hai.

    ReplyDelete
  40. अमरेन्द्र जी बहुत सुन्दर मूलभाव प्यार से लवरेज प्यारी रचना ..हर पंक्ति सटीक और प्यारी ..
    बधाई आप को लाजबाब ...
    धन्यवाद और आभार ..अपना स्नेह और समर्थन दीजियेगा
    भ्रमर ५
    दर्द की अंधी गली है , कोई भी न मोड़ है
    सभी स्वप्न टूटकर बिखरे है यहाँ, फिर भी
    हम तेरी खातिर उन गलियों से
    रिश्ता निभाए बैठे है

    ReplyDelete
  41. वाह....बढ़िया लिखा है भाई......

    ReplyDelete
  42. मिल गयी 'रौनक ए जहा' मुझको ,तेरे नाम से
    हम अपने नाम को तुझसे मिलाये बैठे है
    बहारो ने भी लंगर डाल दिए, तेरे नाम से
    जो झील के उस पार डेरा जमाये बैठे है.. bhaut hi accha likha hai aapne..

    ReplyDelete
  43. waah... bahut sundar abhivyakti...

    ReplyDelete
  44. Main Fir Aaya..

    Happy Durga Puja...

    ReplyDelete
  45. बहुत ही अच्छा लगा| क्या खूब लिखते हैं !! आप मेरे पोस्ट पे आकर मेरा हौसला बढ़ने के लिए आपका धन्यवाद ! आप को बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक दशहरा पर्व पर हार्दिक शुभ कामनाएं एवं बधाई

    ReplyDelete
  46. Suman ji bahut bahut shukriya hausla afjai ke liye

    ReplyDelete
  47. Adarniya rashmi prabha ji taha tak aane aur rachna ke saath saath mera bhi maan rakhne kel iye tahe dil se shukriya

    ReplyDelete
  48. SHASHI PANDEY ji bahut bahut shukriya

    ReplyDelete
  49. Vijay Pratap Singh Rajput ji tahe dil se shukriya .aise hi sneh banaye rakhiye .......

    ReplyDelete
  50. Surendra shukla" Bhramar"5 ji namaskar........rachna ke saath hamara bhi abhinandan kerne ke liye shukriya....aabhar

    ReplyDelete
  51. Adraniya Kuwar ji bahut bahut shukriya

    ReplyDelete
  52. Anil Avtar ji shukriya hausla afjai ke liye shukriya

    ReplyDelete
  53. Vandana ji shurkiya yaha tak aane aur rachna ka maan rakhne ke liye

    ReplyDelete
  54. Arun Sathi ji hausla afjai ke lye shurkiya

    ReplyDelete
  55. डॉ. जेन्नी शबनम ji shukriya

    ReplyDelete
  56. Dr (Miss) Sharad Singh ji bahut bahut shurkiya

    ReplyDelete
  57. अनामिका की सदायें ...... ji hausla afjai ke liye bahut bahut shurkiya

    ReplyDelete
  58. राजीव थेपड़ा ( भूतनाथ )ji abhinandan

    ReplyDelete
  59. बहुत खूब लिखा है.....
    बहुत ही बढ़िया लगा.......
    कुछ ऐसी ही कोशिश मैंने भी की है आप लोगो से आशीर्वाद चाहिए ...
    &npbs; मेरे शब्द

    ReplyDelete
  60. shephali JI YAHA TAK AANE AUR RACHNA KA MAAN RAKHNE KE LIYE BAHUT BAHUT SHURKRIYA

    ReplyDelete
  61. प्रतीक माहेश्वरी SHUKRIYA

    ReplyDelete
  62. सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना लिखा है आपने ! शानदार प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com

    ReplyDelete
  63. बहुत ही सुंदर .... एक एक पंक्तियों ने मन को छू लिया ...

    ReplyDelete
  64. कुछ दिनों से बाहर होने के कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका

    ReplyDelete
  65. Kavita verma ji bahut bahut shukriya

    ReplyDelete
  66. तेरी तस्वीर को आईना बनाये बैठे है, अब अपनी दुनिया भुलाये बैठे है

    बहुत सुंदर!

    ReplyDelete
  67. जिंदगी जो , अब तक व्यर्थ थी, मेरी
    उसे तेरे लिए फागुन का मदमाता मौसम बनाये बैठे है

    बहुत खूबसूरत......

    ReplyDelete
  68. Veena ji rachna ke saath hanara bhi maan rakhen ke liye bahut bahut shukriya

    ReplyDelete
  69. behad khoobsoorati se varnana kar diya prem ka aapne...
    samajh nahi aa raha hai ki koun si pankti ki tareef karun aur koun sa stanza bina tareef ke rahne du...

    ReplyDelete
  70. "दर्द की अंधी गली है, कोई भी न मोड़ है
    सभी स्वप्न टूटकर बिखरे है यहाँ, फिर भी
    हम तेरी खातिर उन गलियों से
    रिश्ता निभाए बैठे है"

    बहुत सुंदर !

    ReplyDelete
  71. मिल गयी 'रौनक ए जहा' मुझको ,तेरे नाम से
    हम अपने नाम को तुझसे मिलाये बैठे है
    बहारो ने भी लंगर डाल दिए, तेरे नाम से
    जो झील के उस पार डेरा जमाये बैठे है



    sundar prastuti aabhar .

    ReplyDelete
  72. Dr. Shastri ji hardik abhinandan ............

    ReplyDelete
  73. @Pooja ji bahut bahut shukriya aise hi aap apna sneh banaye rakhe
    @ Sushila ji aap aise hi apna sneh banaye rahiya ....aapka sahyog hamare liye bahut jaruri hai..

    ReplyDelete
  74. @Naveen Mani Tripathi ji shukriya
    @Mamta Bajpai
    bahut bahut shukriya

    ReplyDelete
  75. मिल गयी 'रौनक ए जहा' मुझको ,तेरे नाम से
    हम अपने नाम को तुझसे मिलाये बैठे है
    बहारो ने भी लंगर डाल दिए, तेरे नाम से
    जो झील के उस पार डेरा जमाये बैठे है
    ! बहुत सुन्दर शब्द ! अभी एक ही रचना पढ़ी है , इसलिए एक ही रचना के लिए कहूँगा , बहुत खूब !

    ReplyDelete