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Thursday, January 17, 2013

“तिलिस्म”





मीलों लम्बे सफ़र
             मीलो लम्बे कारवां,
तलाशते जिंदगी
अनाड़ियों की तरह

पंखो की थकान
मन का भटकाव,
एक अंतहीन सफ़र
पानी के बुलबुलों की तरह

तेज बहती धारा
मंद –मंद बहती हवा,
सोते हुए लोग
भागते तेज बदलो की तरह

पैगाम एक दुसरे का
एक-दुसरे की जुबान पर,
अस्थिर जीवन फीकी रौशनी
यहाँ सब कुछ एक तिलिस्म की तरह

अमर ====


10 comments:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 19/01/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. बेहतरीन.....
    बहुत अच्छी रचना.

    अनु

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  3. बहुत बेहतरीन,,,लाजबाब अभिव्यक्ति,

    recent post: मातृभूमि,

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  4. अगला पल क्या, यह न जाना,
    सब लगता रहस्य, अद्भुत सा

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  5. सुन्दर रचना

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  6. सच ..जिंदगी में अनिश्चित ता का ही नाम है ...
    बहुत बढ़िया ..
    ..कृपया बदलो के जगह
    .. बादलों ... लिख लें

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  7. सब रहस्य ही रहस्य है ...इस जिंदगी का कोई ठोर-ठिकाना नहीं है

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  8. आपकी हर रचना की तरह यह रचना भी बेमिसाल है !

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