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Wednesday, June 6, 2012


दूर, बहुत दूर, 
मेरी यादों के झुरमुटों में 
झीने कपड़े से बंधा 
मेरी साँसों के सहारे 
तेरी यादों का वो गट्ठर,  
जिन्हें वक्त के दीमक ने 
अंदर ही अंदर खोखला 
कर दिया है,
बचा है जिसमे
सिर्फ और सिर्फ ,
मेरी अपने अकेले की साँसों का झीनापन 
जो शायद , किसी भी वक्त, 
निकल कर गठरी से 
तड़पने लगे ,

वही कुछ दूर पे ही 
बैठे है 
भूखे ,प्यासे, कुलबुलाते 
चील और गिद्ध , 
जो न जाने 
कब से इसी आस में है 
की कब मेरा बेजान होता जिस्म 'बेजान' हो 
और वो अपनी भूख मिटा सके......

निरंतर,
दिन प्रतिदिन 
खोखले होते बिम्ब, 
दिखने लगे है.... 
झीना कपडा भी हो रहा है जार-जार
फिर भी लोग आकर्षित होते है, 
मेरी ख्वाहिशे देखने को, ... 
न जाने क्यूँ ....
शायद, 
कैद करना चाहते हों, अपने-अपने कैमरो में 
सजाना चाहते है 
पेंटिंग्स की तरह, अपने घरो में  
इससे पहले शायद ही, उन्हें 
किसी के सपने 
ऐसे भरे बाजार तड़पते दिखे हों 
"तेरी यादों का वो गट्ठर" 

अमर*****

52 comments:

  1. दर्द भरी चाहत कों लोग तमाशा समझते हैं कभी कभी ...
    दर्द भरी नज़्म ...

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    1. Naswa ji shukriya yaha tak aane ke liye

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  2. ऐसे भरे बाजार तड़पते दिखे हों
    "तेरी यादों का वो गट्ठर",,,,,,

    मन मोहक भावपूर्ण सुंदर प्रस्तुति ,,,,,

    WELCOME TO MY RESENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: स्वागत गीत,,,,,

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  3. अति सुन्दर मन भावुक सा हो गया आपकी रचना पढते
    आपको हार्दिक बधाई
    दिनेश पारीक

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  4. बहुत सुन्दर रचना...बहुत बढ़िया प्रस्तुति!आभार .

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  5. बहुत ही गहरे और सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....

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  6. bhawukta se bharpoor aapki rachna.../

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  7. waah kya baat hai anupam bhav sanyojan behtreen bhav abhivyakti

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  8. वाह...
    बहुत बहुत सुंदर.......

    अनु

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  9. वाह ... बेहतरीन

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  10. बहुत बहुत सुंदर रचना..

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  11. महफूज़ यादें ...संजोयी हुई सौगातें जब 'जीर्ण शीर्ण' होने लगें...तो बस अंत निकट ही है .......सुन्दरता का...रूमानियत का...उम्मीद का...!!!!!!!

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  12. वाह क्या तडप है, बहुत ही सुंदर ।

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  13. कुछ ऐसा हैं जो दिल पर गहरा असर करता हैं ...

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    Replies
    1. Shukriya rachna ke saath hamara maan rakhne ke liye

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  14. बहुत सुन्दर रूपक जिसमें सारा कुछ सँवर गया है !

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  15. इससे पहले शायद ही, उन्हें
    किसी के सपने
    ऐसे भरे बाजार तड़पते दिखे हों
    "तेरी यादों का वो गट्ठर"
    मेरी भी ख्वाहिश देख सकूँ ....
    "तेरी यादों का वो गट्ठर" ....
    तब शायद कुछ लिख सकूँ ....

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  16. यादों की तड़प .... गहन अभिव्यक्ति

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  17. यादों के झुरमुटों में कितने ही दर्द समाए हुए हैं ...भावपूर्ण रचना..

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  18. आपकी यादों का गट्ठर जाने कितनी संवेदनाएं समेटे है । जीवन्तता के साथ

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  19. बहुत गहरे अर्थ के साथ लिखी गई कविता ...बेहद खूबसूरत भाव ...बहुत उम्दा

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  20. गहरे अर्थबोध की कविता

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  21. yadon ka gatthar ka har pej apane men kuchh chhipaye rahata hai aur jab jo ulat gaya kuchh naya bhav dekar rach jata hai.
    gahan bhavon purn rachna ke liye aabhar !

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  22. तीव्र वेदना की अनुभूति झलक रही है इस रचना में....सुन्दर प्रस्तुति...आभार!

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  23. दर्द को बोझ से इतने भारी महसूस नहीं हुए कभी यादों के गट्ठर।

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  24. wah ! itna dard ,itne gehre bhav...gr888 write

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  25. यादों का वो गट्ठर achchha hai...:)

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  26. बहुत सुंदर और गहन भाव लिए हुये ... सुंदर प्रस्तुति

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  27. चील और गिद्ध भी तो हम में से ही कोई है जो नज़रें गडाए रहता है और मौक़ा पाते ही वार करता है, यादें जब हार जाती हैं, यादें जब छोड़ जाती हैं. मन को बहुत गहरे छू गई रचना, शुभकामनाएँ.

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  28. gahan bhaav ...liye sundar rachna ...shubhkamnayen .

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