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Monday, February 27, 2012

"कुछ ख्वाब- कुछ मंजिले"



कल रात
लिखते लिखते 
आँख लग गयी
ख्वाब आ गये ,
जो चुभने  से लगे
मेरी ही आँखों में,
ये कैसे ख्वाब
जो मेरे होकर मुझे ही चुभे ******

कही  दूर, कही पास  
बहुत दौड़ भाग 
मंजिल पाने को 
मिल भी गयी 
वो खुश भी बहुत हुआ 

पर ये क्या 
मै भी तो साथ था 
बहुत दौड़ा 
उसके पीछे पीछे 
जिसने मंजिल को पाना चाहा
पर मेरी मंजिल कहाँ....... 

ये कैसे ख्वाब 
ये कैसी मंजिले 
जो  मेरे होकर भी 
मेरे नहीं ******

43 comments:

  1. ख्वाबों में अक्सर ऐसा ही होता है ... सुंदर प्रस्तुति

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    1. Shurkiya aapka itne sunder comments dene ke liye

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  2. sunder ....khwab aise hi hote hai
    kai bar khud ko chubh jate hai ...
    sunder prastuti

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  3. ख्वाब तो बुलाते हैं, जो मिल गये, वो ख्वाब में आयेंगे भी नहीं..

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  4. कुछ ख्वाब कुछ मंजिलें
    ऐसे ही होते हैं
    जो अपने होकर भी
    अपने नहीं होते हैं...
    सुंदर प्रस्तुति...

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    Replies
    1. Sandhya Ji shukriya
      sapne to sapne hi hote hai

      Delete
  5. अपने ख्वाब ही चुभते हैं
    अपने ही ख्वाब मरहम लगाते हैं ....

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  6. एक ख्वाब सी लगी रचना हमें....... बहुत ही अच्छी भावाभिवय्क्ति......

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    Replies
    1. Sushma ji rachna ko sarahane ke liye aabhar

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  7. ये कैसे ख्वाब
    ये कैसी मंजिले
    जो मेरे होकर भी
    मेरे नहीं ******
    यही है ज़िन्दगी

    ReplyDelete
    Replies
    1. Veerubhai ji bahut bahut shukriya.aise hi apna sneh banaye rahiye

      Delete
  8. ये कैसे ख्वाब
    ये कैसी मंजिले
    जो मेरे होकर भी
    मेरे नहीं ****** very touching.

    ReplyDelete
  9. ये कैसे ख्वाब
    ये कैसी मंजिले
    जो मेरे होकर भी
    मेरे नहीं ******
    bahut dil ko choonewali prastuti.badhaai aapko.
    meri nai post per aaapka swagat hai.link hai.
    www.prernaargal.blogspot.com

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    Replies
    1. Prerna ji bahut bahut shukriya.......aapka sneh paker bahutaccha lga..........aabhar

      Delete
  10. जब ख्वाब अपने हैं...तो चुभन भी खुद को ही होगी...ये ख्वाब ही तो हैं जो हमें चलाये रखते हैं...

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    1. Vaanbhatt ji aapki bat bikul sahihai
      aabhar

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  11. ख्वाबगाह से बाहर निकले, ख़्वाब ख्वाह हो जाते हैं ।

    ख्वाहमखाह ख्यालों को खरभर, खार खेद बो जाते हैं ।।

    दिनेश की टिप्पणी - आपका लिंक

    http://dineshkidillagi.blogspot.in

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  12. अच्छी लगी रचना ..

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  13. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

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  14. पर ये क्या
    मै भी तो साथ था
    बहुत दौड़ा
    उसके पीछे पीछे
    जिसने मंजिल को पाना चाहा
    पर मेरी मंजिल कहाँ.......

    बेहतरीन कविता. मन को सरोबार कर गया. आभार. बारामासा पर भी पधारें.

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  15. सुंदर अभिव्यक्ति !!

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  16. bahut sunder prastuti.badhaai aapko.

    आप का बहुत बहुत धन्यवाद की आप मेरे ब्लॉग पर पधारे और इतने अच्छे सन्देश दिए /आपका आशीर्वाद मेरी रचनाओं को हमेशा इसी तरह मिलता रहे यही कामना है /मेरी नई पोस्ट आपकी टिप्पड़ी के इन्तजार में हैं/ जरुर पधारिये /लिंक है /
    http://prernaargal.blogspot.in/2012/02/happy-holi.html
    मैंने एक और कोशिश की है /अगर आपको पसंद आये तो उत्साह के लिए अपने सन्देश जरुर दीजिये /लिंक है
    http://www.prernaargal.blogspot.in/2012/02/aaj-jaane-ki-zid-na-karo-sung-by-prerna.html

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    Replies
    1. Prerna ji aapka bhi bahut bahut dhanyawad........

      Delete
  17. अमरेन्द्र जी,..
    बहुत अच्छी प्रस्तुति,इस सुंदर रचना के लिए बधाई,...
    आपका फालोवर बन गया हूँ आप भी फालो करे मुझे खुशी होगी,
    ताकि पोस्ट पर आना जाना बना रहेगा,...आभार

    NEW POST ...काव्यान्जलि ...होली में...
    NEW POST ...फुहार....: फागुन लहराया...

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    Replies
    1. Dheerendra ji aapke aane se yaha raunak aa jati hai ........aap apna sneh aise hibanaye rahiye

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  18. Replies
    1. Dr. Monika Ji aabhar...
      aap aise hi sneh banaye rahiye

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  19. ख्याबो के मंज़र हमने भी देखे हैं
    सपनो में अपने ही बिछड़ते देखे हैं |.......अनु

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  20. Sameer Bhai Sahb bahut Bahut Shukriyan
    Yaha tak aane ke liye

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  21. बढिया ...होता है यही जिंदगी है ,हर ख्वाब पूरा नही होता पर नई कोई मजिल हमेशा आपके इंतज़ार मे है

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