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Sunday, November 14, 2010

तेरा आना


जी  लेने  दो  इस  इक  सांस  में  
वो  सारे   पल  मुझको  
सदियों  जिस  पल  के  लिए  
साँसों  का  गला घोटता आया  हूँ  में  

अब आ गए हो जो 
साथ मेरे चलने को 
तो मंजिल भी मिल जाएगी 
तुम दो कदम चलो तो सही 
संग खुशिया भी आएँगी 

16 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ...

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  2. बहुत बढ़िया,
    बड़ी खूबसूरती से कही अपनी बात आपने.....

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  3. Sanjay ji hauslafajai k liye bahut bahut shukriya

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  4. अब आ गए हो जो
    साथ मेरे चलने को
    तो मंजिल भी मिल जाएगी
    तुम दो कदम चलो तो सही
    sath chale rahe manjil jaroor mil jayegi sir ji

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  5. अंतिम पंक्तियाँ दिल को छू गयीं.... बहुत सुंदर कविता....

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  6. तुम दो कदम चलो तो सही
    संग खु़शियां भी आएंगीं।

    कोई साथ साथ चले तो सब कुछ अच्छा हो जाता है।
    सुंदर और भावनाप्रधान कविता के लिए बधाई।

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  7. Mahendra ji Aap yaha tak aaye aur rachna ka saraha acha laga aapka bahut bahut shukriya ...................

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  8. अमरेद्र कविता बहुत मधुर है , इसमें गला घोटना जैसे शब्द अखरते हैं ! छुई मुई प्रेमिका पर भारी गहने अच्छे नही लगते हैं न ! सुंदर है !

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  9. Pranam Badi Maa" aur guidance ke liye bahut bahut shukriya" aage se umeed erta hu aapko shikayat ka mauka nahi dunga

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