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Monday, November 1, 2010

आखिरी सफ़र


सो जाने दो,
मुझे मेरे बिस्तर पे आज  ,
कई सदियों  से ,
सोया नहीं हूँ,
उन बाँहों  की आस में...............

बिस्तर  पे मेरे  ,
टाट का पैबंद है,
तो क्या हुआ, 
नींद फिर भी चैन की आएगी मुझको, 
सदियों से उसके अह्सांस ने, 
सोने नहीं दिया............... 



2 comments:

  1. वाह सर...
    वाकई बहुत अच्छा लगा
    'नींद फिर भी चैन की आएगी मुझको, '
    ...............अच्छी रचना

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  2. Sanjay ji apna bahumulya samay dene k liye shukragujaar hu aapka

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