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Tuesday, September 10, 2013


रुको तो जरा !
मैं देख तो लूँ ,
इन पीछे छूट जाने वाले अप्रतिम पलों में
क्या क्या पीछे छूट रहा है ,
तुम्हे तो बड़ी जल्दी रहती है
हमेशा से ,...
और हर बार
कुछ न कुछ छोड़ ही आते हो ,
मेरे पीछे
जिन्हें सहेजने के लिए
मुझे फिर से लौटना होता है
उन्ही पलों में, उसी जगह,
जिनमे तुम्हारी ,
कुछ बातें,कुछ यादें ,
तो कुछ तुम ही ......
बिखरे- बिखरे से रहते हो ,
जहा जाने के बाद
मेरा फिर से लौट आना
बड़ा मुश्किल सा लगता है,
इस बार मैं कोई हडबडाहट
नहीं करने वाला
और हा तुम्हे भी ऐसा कुछ नहीं
करने दूंगा
जिससे तुम मुझसे आगे निकल जाओ
और मैं वही उसी जगह
ढूंढता रहू तुम्हारे कदमो के निशान..........

अमर=====

4 comments:

  1. बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति,,अमरेन्द्र जी ...

    RECENT POST : समझ में आया बापू .

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  2. खुबसूरत अभिवयक्ति.....

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  3. कुछ रुको तो जरा... कुछ कह तो लूँ.. दोस्त बहुत ही प्यारे भाव हैं

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