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Saturday, September 4, 2010

''मेरी मंजिल''

''मेरी मंजिल''




''करता रहा


इबादत,


सारी उम्र उसकी,


कभी 'वो'


मेरे


पास न आया,


खत्म हूआं,


जो


सफ़र मेरा,


वो बन के


मंजिल मेरी,


मुझको 'खाक' में


मिलाने आया''

Wednesday, August 25, 2010


पलके बिछाये  , राह  निहारु
अंतरात्मा  से  तुझे  पुकारू
नयनों  में  बसी  तस्वीर  तेरी  
क्यू  न  आये  ओ  पिया  बैरी

Saturday, August 21, 2010

****सौगात****

"तू मेरी हर बात में है



मेरी सुबह में ,


मेरी शाम में है,


मेरी जीवन की नशीली रातो में ,


मेरे सूखे में और ,


मेरी बरसात में है "






"कोई मुझसे मिलना चाहे,


तो मिले तुझे,


मुझसे मिलने का मजा,


तेरे साथ में है"






"कोई मुझे ढूँढना चाहे ,


तो ढूंढे तुझे,


मेरे जीवन का पता तेरी


हर सांस में है "


तू मेरी हर बात में है

Monday, July 12, 2010

कोई रिश्ता सा है शायद





ये बारिश का मौसम ,

और तेरी याद का आना ,

दोनों में कोई रिश्ता सा है शायद ,

ये जब भी आतें है ,

झूम के आते है ,


घर टूटे या टूटे इंसान ,

या अपना काम कर के ही जाते है ,


वो बहुत रोया है.

मेरे घर के आँगन में ,

तपिश उसकी अब भी ,

मेरी साँसों में है ,


रुक -रुक के कभी तो कभी बेखटक रोया है ,

हर बार सिर्फ उसने मुझे ही भिगोया है ,

ये बारिश का मौसम ,

और तेरी याद का आना I

Sunday, June 27, 2010

"प्यार की तहजीब "

उम्मीद की थी प्यार की तहजीब ने


शायद यही भूल थी मेरी,


जो आज गिरते हुए अश्को में

अपनी हसरत ढूनता हूँ ,

कुछ पल को ठहर जाता जो वक्त

तो अपनी वही सूरत ढूनता हूँ ,


गुजरे थे जिन गलियों से कभी हम

उन में प्यार के बादल ढूनता हूँ


शायद बरस जाये वो ही मुझपे

यही सोच कर रोज उस गली से गुजरता हूँ


मुझे इन्तेजार है उस दिन का

की शायद लौट आये वो तुम्हारी याददास्त

मेरी वो उम्मीद ,

मै पागल हूँ न

आज भी दरवाजे की तरफ देखता हूँ