Monday, July 12, 2010
कोई रिश्ता सा है शायद
ये बारिश का मौसम ,
और तेरी याद का आना ,
दोनों में कोई रिश्ता सा है शायद ,
ये जब भी आतें है ,
झूम के आते है ,
घर टूटे या टूटे इंसान ,
या अपना काम कर के ही जाते है ,
वो बहुत रोया है.
मेरे घर के आँगन में ,
तपिश उसकी अब भी ,
मेरी साँसों में है ,
रुक -रुक के कभी तो कभी बेखटक रोया है ,
हर बार सिर्फ उसने मुझे ही भिगोया है ,
ये बारिश का मौसम ,
और तेरी याद का आना I
Sunday, June 27, 2010
"प्यार की तहजीब "
उम्मीद की थी प्यार की तहजीब ने
शायद यही भूल थी मेरी,
जो आज गिरते हुए अश्को में
अपनी हसरत ढूनता हूँ ,
कुछ पल को ठहर जाता जो वक्त
तो अपनी वही सूरत ढूनता हूँ ,
गुजरे थे जिन गलियों से कभी हम
उन में प्यार के बादल ढूनता हूँ
शायद बरस जाये वो ही मुझपे
यही सोच कर रोज उस गली से गुजरता हूँ
मुझे इन्तेजार है उस दिन का
की शायद लौट आये वो तुम्हारी याददास्त
मेरी वो उम्मीद ,
मै पागल हूँ न
आज भी दरवाजे की तरफ देखता हूँ
शायद यही भूल थी मेरी,
जो आज गिरते हुए अश्को में
अपनी हसरत ढूनता हूँ ,
कुछ पल को ठहर जाता जो वक्त
तो अपनी वही सूरत ढूनता हूँ ,
गुजरे थे जिन गलियों से कभी हम
उन में प्यार के बादल ढूनता हूँ
शायद बरस जाये वो ही मुझपे
यही सोच कर रोज उस गली से गुजरता हूँ
मुझे इन्तेजार है उस दिन का
की शायद लौट आये वो तुम्हारी याददास्त
मेरी वो उम्मीद ,
मै पागल हूँ न
आज भी दरवाजे की तरफ देखता हूँ
Wednesday, June 9, 2010
"फिर साथ - साथ चलते है"
मेरी जिंदगी के कुछ लम्हे,
खास बन गए,
जब तक थे साथ मेरे
मेरी सांस बन गए,
मै हूँ जब तक,
मै हूँ आपका ,
आप भले ही हमसे ,
घात कर गए ,
आप समझ न पाए
मेरे हालात को ,
बेवफाई का नाम दिया है,
मेरे जज्बात को ,
याद तुम्हे आती न होगी
मुमकिन है ये
पर जब आती होगी
तो बस "याद" आती होगी
बहते होंगे तेरे भी नैनों से झरने,
जब यादों के झुरमुट में आते होंगे,
कोई तो काँटा होगा,
जो तुम्हारे दामन में चुभ जाता होगा ,
बंद कर के अपनी आँखे,
तुम निकल न पाते होंगे ,
लाख कोशीस करके भी
कुछ पल को ठहर जाते होगे,
चलो मिलते है एक बार फिर से
शिकवे भी दूर करते है,
वक्त ने साथ दिया
तो फिर साथ - साथ चलते है,
Thursday, May 20, 2010
"खामोश निगाहे"
मेरी खामोश निगाहे,
अब भी तेरा पता ढूंढें,
तू कही भी हो
ये तेरा ही निशाँ ढूंढें ,
मै कैसे कह दू
ये भूल गयी है तुझे ,
ये अब भी उस गली में
पलके बंद कर के अपनी, तेरा ही मकां ढूंढे,
शाम होते ही
पैमाने भी देखकर ,
मुझको अपने आगोश में
निकल पड़ते है तेरा पता ढूंढे ,
रात होती है जो
गमो के साथ ए 'अक्स',
तो खुद सवेरा
आने का बहाना ढूंढे ,
वक्त गुजारे है
तेरे दामन में जो हमने ,
मेरी आँखे उन्ही सुरमयी
नजारों का निशाँ ढूंढे ,
सुर्ख लाली सी छायी है आज भी आँखों में
ये तेरी बिंदिया की लाली को आज भी ढूंढे I
अब भी तेरा पता ढूंढें,
तू कही भी हो
ये तेरा ही निशाँ ढूंढें ,
मै कैसे कह दू
ये भूल गयी है तुझे ,
ये अब भी उस गली में
पलके बंद कर के अपनी, तेरा ही मकां ढूंढे,
शाम होते ही
पैमाने भी देखकर ,
मुझको अपने आगोश में
निकल पड़ते है तेरा पता ढूंढे ,
रात होती है जो
गमो के साथ ए 'अक्स',
तो खुद सवेरा
आने का बहाना ढूंढे ,
वक्त गुजारे है
तेरे दामन में जो हमने ,
मेरी आँखे उन्ही सुरमयी
नजारों का निशाँ ढूंढे ,
सुर्ख लाली सी छायी है आज भी आँखों में
ये तेरी बिंदिया की लाली को आज भी ढूंढे I
Friday, April 30, 2010
"मोम का जिस्म "
मोम का जिस्म लेकर,
आग से खेला किया,
मुमकिन थी जीत मेरी,
पर हर पल हारा किया,
ये मालूम था इस खेल में,
हार होनी है मेरी ,
पर न था ये मालूम,
की जिसे जीता रहा हर पल ,
उसी ने मेरी "हार का सौदा " किया,
फिर भी अफ़सोस न होता हार का,
जो हार मेरी उसके आगोश" में होती,
पर वो बेरहम यहाँ भी ,
बस दूर से खेला किया ,
और मै "मोम का जिस्म " लेकर,
आग से खेला किया !
आग से खेला किया,
मुमकिन थी जीत मेरी,
पर हर पल हारा किया,
ये मालूम था इस खेल में,
हार होनी है मेरी ,
पर न था ये मालूम,
की जिसे जीता रहा हर पल ,
उसी ने मेरी "हार का सौदा " किया,
फिर भी अफ़सोस न होता हार का,
जो हार मेरी उसके आगोश" में होती,
पर वो बेरहम यहाँ भी ,
बस दूर से खेला किया ,
और मै "मोम का जिस्म " लेकर,
आग से खेला किया !
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